भागलपुर जिले के ‘सुलतानगंज’ जगह का क्या है इतिहास

अजगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज (Sultanganj), माँ गंगा और भगवान शिव को समर्पित है। सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु यहाँ के उत्तरवाहिनी गंगा से जल भर कर शिव जी के अलौकिक 12 ज्योतिर्लिंग लिंगों में से एक बाबा देवघर और बैद्यनाथ मंदिर में जल चढ़ाने जाते हैं, सुल्तानगंज से देवघर की दूरी क़रीब 104 किलोमीटर है, जिसे श्रद्धालु अपने किये मनोकामना के हिसाब से पैदल या मोटरगाड़ी से पूरा करते हैं।

सुल्तानगंज शहर के गंगा किनारे बसे अजगैबीनाथ मंदिर की 200 वर्ष पुरानी फोटो पेंटिंग

सुल्तानगंज गंगा के किनारे एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है जिसका नाम अजगैबीनाथ मंदिर है, यह मंदिर सैकड़ों वर्षों से एक बड़े से चट्टान पर यथार्थ खड़ा है। सावन और भादो के महीने में मंदिर के चारों ओर गंगाजी का पानी आ जाता है, उस समय मंदिर एक छोटे से टापू पर खड़ा है ऐसा प्रतीत होता है। सूर्यास्त के समय यह दृश्य मनमोहक है।

  • सुल्तानगंज बाबा अजगैबीनाथ धाम के लिए प्रसिद्ध है
  • सुल्तानगंज का पुराना नाम जहांगीरा है
  • केवल सुल्तानगंज और इसके आसपास के इलाके में ही उत्तरवाहिनी गंगा (गंगा उत्तर दिशा की ओर) बहती है  
  • अजगैबीनाथ मंदिर को हम गैविनाथ/गैविमंठ के नाम से भी जानते हैं
Sultanganj Mandir Photo by sunny rana photography
Sultanganj Mandir Photo, Sawan Mela by sunny rana photography

बिहार के सुल्तानगंज (Sultanganj) में आकर गंगा का उत्तरवाहिनी होने की कहानी

गंगोत्री से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में जा रही गंगा का एकाएक सुल्तानगंज में उत्तर दिशा की ओर मुड़ना सामान्य दिशा से एकदम विपरीत है। 

उत्तर दिशा शिव जी का निवास स्थान कैलाश पर्वत की दिशा है। इसिलिये धार्मिक रूप से सुल्तानगंज के गंगा का जल धार्मिक कार्यों के लिये बहुत महत्वपूर्ण माना है।

सुल्तानगंज की गंगा के बारे में एक कथा जो बहुत प्रसिद्ध है, कहा जाता है की आदि काल में, अभी के सुल्तानगंज के आसपास के इलाके में एक महा शक्तिशाली ऋषि हुआ करते थे जिनका नाम जाह्नु था।

Sultanganj old Painting (Photo) 1814 - John Newnam - British Library copy
Sultanganj 1814 – John Newnam
Sultanganj old Painting (Photo) 1824 - Thomas Sutherland - British Library copy
Sultanganj 1824 – Thomas Sutherland

एक बार की बात जाह्नु ऋषि कड़ी तपस्या कर रहे थे। यह बात उस समय की है जब भागीरथ, ब्रम्हा जी को खुश करके माँ गंगाजी को स्वर्गलोक से पृथ्वीलोक लेकर आये थे।

भागीरथ के द्वारा तय मार्ग अनुसार गंगा को गंगोत्री से निकल कर आज के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड होते हुये बंगाल की खाड़ी में प्रवाह होना था।

लेकिन जब पहली बार गंगा, सुल्तानगंज (अभी का नाम) के क्षेत्र से गुजर रही थी तो गंगा के तेज बहाव की आवाज से जाह्नु ऋषि की तपस्या भंग हो गई, ऋषि गुस्से में आ गये और उन्होंने गंगा का एक घूंट पानी अपने मुंह में ले लिया, ऋषि के पानी पीते ही गंगा क्षण-भर में ही धरती से विलीन हो गई। 

जब भागीरथ को इस बात का पता चला तो वो भागे भागे ऋषि के पास आये और उनसे माफ़ी मांगी और गंगा को धरती पर लाने का प्रोयोजन बताया तब जाकर ऋषि का गुस्सा कहीं शांत हुआ।

जब ऋषि का गुस्सा शांत हुआ तो उन्होंने अपने जाँघा के पास एक चीरा लगा कर गंगा को मुक्त किया।

Sultanganj old Painting (Photo) 1790 - Thomas Daniell - Yale Center for British Art2 copy
Sultanganj 1790 – Thomas Daniell

माना जाता की तभी से गंगा सुल्तानगंज में उत्तर दिशा की दिशा की ओर बह रही है, कहते हैं गंगा का यहाँ पुनर्जन्म हुआ है और इसे ऋषि जाह्नु की पुत्री भी मानते हैं, ऋषि जाह्नु के ही नाम पर ही गंगा का नाम जहान्वी पड़ा।

उत्तरवाहिनी गंगा का महत्व 

उत्तरवाहिनी गंगा का जल धार्मिक कार्यों के लिये बहुत महत्वपूर्ण है, यह औषधीय और अलौकिक भी है। पुरे भारतवर्ष में सिर्फ भागलपुर ज़िले के सुल्तानगंज प्रखंड के आसपास के इलाकों में ही गंगा उत्तर दिशा की ओर बहती है।

Sultanganj Old Painting (Photo) - 15 August 1787 - William Hodges - Wellcome Library

सुल्तानगंज के बाबा अजगैबीनाथ मंदिर(Ajgaivinath Temple) के बारे में

अजगैबीनाथ मंदिर शहर के एक छोर पर गंगा के बिलकुल किनारे पर है, सावन-भादो के महीने में तो गंगा अपने पानी से मंदिर को चारों तरफ़ से घेर लेती है, दृश्य ऐसा दिखता है जैसे मानो मन्दिर किसी टापू पर हो। 

बाबा अजगैबीनाथ का मंदिर कई सौ साल पुराना है, ऐसा ही आश्चर्यजनक मंदिर बिहार के कहलगाँव में भी है जो टापूनुमा है और बड़े बड़े चट्टानों पर खड़ा है

सुल्तानगंज स्थित बाबा अजगैबीनाथ मंदिर जिस चट्टान पर खड़ा है माना जाता है की यह स्वम्भू है।

इसमें कोई शक नहीं है की यह बहुत प्राचीन पूजा स्थल रहा होगा,

Sultanganj old Painting (Photo) 1828 - Marianne Jane Jemes - British LIbrary copy
Sultanganj1828 – Marianne Jane Jemes

यहाँ के चट्टान पर रहस्यमय प्राचीन मूर्तियों की कलाकृति एवं अवशेष देखने को मिलतें हैं अजगैबीनाथ मंदिर की पुष्टि कम से कम 15वी सदी से की जाती है।

एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को यहां अपना धनुष दिया गया था और उस धनुष का नाम अजगव था इसीलिए इस जगह का नाम अजगैबीनाथ पड़ा।

इस जगह का प्राचीन नाम जहांगीरा भी है, जो जाह्नु ऋषि के नाम से लिया गया है। जहांगीरा जाह्नु गिरी (जह्नु की पहाड़ी) या जाह्नु गृह (जह्नु का निवास) का विकृत रूप है।

जहाँगीरा अब सुल्तानगंज शहर का एक छोटा सा गाँव है।

सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ मंदिर और गंगा की अभी हाल की तस्वीरें

सुल्तानगंज के बारे में पूछे जाने वाले ज्यादार सवाल – FAQ

सुल्तानगंज से देवघर कितना किलोमीटर है

पैदल लगभग 98 किलोमीटर, वाहन से 104 किलोमीटर से 110 किलोमीटर

सुल्तानगंज पिन कोड

सुल्तानगंज का पिन कोड 813213 है।

सुल्तानगंज का पुराना नाम क्या है

सुल्तानगंज का पुराना नाम जहांगीरा है।

Sultanganj to deoghar distance kawariya path

98 km

Sultanganj to deoghar distance by road

104 km

Sultanganj to deoghar distance on foot

98 km